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विवाद के बाद चुनाव आयोग का फॉर्म-6 पर बड़ा फैसला, Annexure-D अब नहीं देना होगा, जानें डिटेल्स

 Written By: Kajal Kumari
 Published : Sep 30, 2026 11:33 am IST,  Updated : Sep 30, 2026 01:06 pm IST

देश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के बीच फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि अब अतिरिक्त डिक्लेरेशन की जरूरत नहीं है। जानें पूरी डिटेल्स...

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला- India TV Hindi
चुनाव आयोग का बड़ा फैसला Image Source : PTI

विवादों के बाद चुनाव आयोग ने उन राज्यों में ऑनलाइन वोटर एनरोलमेंट फॉर्म 6 से SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) से जुड़ी अतिरिक्त घोषणापत्र को हटा दिया है, जहां वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न पूरा हो चुका है। यह फैसला आयोग की पूरी टीम द्वारा यह तय किए जाने के कुछ दिनों बाद लिया गया कि यह ज़रूरत सिर्फ़ इस प्रक्रिया के दौरान ही लागू होगी। यह घोषणापत्र, जिसमें नए आवेदकों को खुद को या अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पहले हुए इंटेंसिव रिविज़न के दौरान तैयार वोटर लिस्ट से जोड़ने वाली जानकारी देनी होती है, उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ECINET पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा जहां SIR चल रहा है।


चुनाव आयोग ने पोर्टल से हटाया
जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां ECINET ऐप और पोर्टल के साथ-साथ संबंधित मुख्य चुनाव अधिकारी के पोर्टल्स से भी यह अतिरिक्त घोषणापत्र हटा दिया गया है। अब एनरोलमेंट चाहने वाले आवेदकों को सिर्फ़ 'रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय कानूनी फॉर्म 6 भरना होगा। यह कदम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी वाली पूरी चुनाव आयोग टीम की 26 सितंबर की बैठक के बाद उठाया गया है।

जानें पूरी डिटेल्स

  • बैठक के बाद, चुनाव आयोग ने कहा था कि फॉर्म 6 के साथ जुड़ा घोषणापत्र SIR के लिए था और "गैर-SIR अवधि के लिए, नियमों (रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स 1960) के अनुसार लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा"। यह मुद्दा तब विवाद का विषय बन गया जब पता चला कि संधू और जोशी ने फॉर्म 6 से जुड़े बदलावों पर आपत्ति जताई थी।
  • फॉर्म 6 वह कानूनी फॉर्म है जिसका इस्तेमाल योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए आवेदन करने के लिए करते हैं। जोशी ने फॉर्म में बदलावों पर इस आधार पर आपत्ति जताई थी कि 'रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना बदलाव नहीं किया जा सकता। संधू भी उनसे सहमत थे।
  • ECINET पर ऑनलाइन फॉर्म 6 प्रक्रिया में SIR से जुड़ा घोषणापत्र शामिल किए जाने के बाद, संधू ने फिर से आपत्ति जताई और इस बदलाव को "अनधिकृत/गैर-कानूनी" बताते हुए इसे हटाने की मांग की।
  • हालांकि, अपने सार्वजनिक बयानों में चुनाव आयोग ने कहा है कि फॉर्म 6 में खुद कोई बदलाव नहीं किया गया था और घोषणापत्र SIR के लिए एक अतिरिक्त ज़रूरत थी। इसमें यह भी कहा गया है कि बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में इस घोषणा को सही ठहराया था।
  • 26 सितंबर को ये फ़ैसले तब लिए गए जब 'इंडियन एक्सप्रेस' ने दावा किया कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फ़ैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी; उनका कहना था कि ये फ़ैसले उनकी जानकारी या सिफ़ारिश के बिना लिए गए थे।
  • आयोग ने 26 सितंबर के अपने बयान में कहा कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंज़ूरी मिली थी। 

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